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सकट चौथ कथा: सौभाग्य और समृद्धि की कहानी

सकट चौथ एक महत्वपूर्ण हिन्दू व्रत है, जो सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति के लिए विशेष रूप से माना जाता है। यह व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को साथ ही ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को भी मनाया जाता है। इस साल, सकट चौथ 2024 कब है, यह जानने के लिए हम इस आदित्य महत्वपूर्ण दिन की चौथी तिथि का हर्षोल्लास के साथ स्वागत करेंगे।

सकट चौथ व्रत की कथा इस प्रकार है:

पुरातात्विक कथा:

कहानी का आरंभ एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में जहां एक सुंदरी नामक गोपिका रहती थी। गोपिका का मन श्रीकृष्ण के प्रेम में लगा हुआ था, और वह हर दिन भगवान की मूर्ति की पूजा करती थी। उसका पति एक साधू था, जो धन्यवादी और भगवान के प्रति भक्तिमय था। गोपिका भी अपने पति के साथ हमेशा उपवास रखती थी।

सकट की कठिनाईयों का समाधान:

एक दिन, गोपिका की भूख बहुत ही बढ़ गई, लेकिन उन्होंने तपस्या का निर्धारण करने के लिए अपने पति से पूछा। पति ने गोपिका को बताया कि इस तपस्या के बाद ही सकट दुर्भाग्य को दूर कर सकता है और भगवान का आशीर्वाद मिलेगा।

गोपिका की तपस्या:

गोपिका ने अपने पति के कहने पर सकट चौथ का उपाय किया। वह दिन भर बिना भोजन के रहीं और रात को चंद्र पूजा की। भगवान की आराधना के बाद, गोपिका ने अपने पति की आयु की वृद्धि के लिए प्रार्थना की और सकट निर्भाग्य को दूर करने की कठिनाईयों को दूर किया।

व्रत का समापन:

गोपिका ने उपवास का समापन किया और अगले दिन भगवान की मूर्ति की और खुशियों के साथ उपवास को खोला। उसके पति को भी दुर्भाग्य से मुक्ति मिली और उनका जीवन समृद्धि से भरा हुआ दिखा। उस दिन से, सकट चौथ का पर्व मनाया जाता है, जिससे विशेष रूप से भारतीय सामाजिक सांस्कृतिक में महिलाएं इसे विशेष उत्साह के साथ मनाती हैं।*

*इस सकट चौथ पर्व के म

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